गांव की सुबह चाय से होती है
🌄 गांव की सुबह और चाय की चुस्की ☕
गांव की सुबह, मतलब सुकून, हरियाली और मिट्टी की खुशबू। मुर्गा बोले नहीं कि पूरा गांव धीरे-धीरे जागने लगता है। कोई कुएं से पानी भरने जाता है, तो कोई बैलों को चारा डालने। और तभी रसोई से आती है एक खुशबू – चाय की।
देसी चूल्हे पर चढ़ी केतली में जब अदरक, तुलसी और काली मिर्च वाली चाय उबलती है, तो उसका स्वाद पूरे गांव की सुबह को खास बना देता है।
बुजुर्ग नीम के नीचे बैठकर पेपर पढ़ते हुए चाय पीते हैं, तो नौजवान मोबाइल में गाना बजाते हुए चुस्की लेते हैं। औरतें अपने काम के बीच एक-दो घूंट चाय की लेकर फिर चक्की, झाड़ू-पोंछा में जुट जाती हैं।
गांव की सुबह की चाय, सिर्फ एक पेय नहीं – ये रिश्तों की गर्माहट, मिट्टी की महक और एक अपनापन है, जो शहरों में मिलना मुश्किल है।
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